विचारों में शक्ति भरनी पड़ती है

विचारों में शक्ति भरनी पड़ती है

सफलता बहुत हद तक तुम्हारी मनःस्थिति पर भी निर्भर करती है। हाँ भाई हाँ यह सत्य है की योगयता, अवसर और साधनों के अभाव में अच्छी खासी योजनाएँ धरी की धरी रह जाती हैं। पर इससे भी बड़ा एक सत्य यह है की उपयुक्त मनःस्थिति के अभाव में योग्यता, अवसर और साधन भी बेकार सिद्ध हो जाते हैं। एक कदम आगे चल कर अगर अनुभव के आधार से कहें तो हमने बहुत सारे अत्यन्त सफलता प्राप्त लोग ऐसे देखें हैं जिनके स्वयं के पास न तो किसी उद्योग की विशेष जानकारी थी और न ही कोई अवसर उनके दरवाजे पर प्रतीक्षा में था - साथ ही उनके पास साधन एकत्रित करना भी एक बड़ी चुनौती थी। फिर भी वह सफलता की सीढ़ियां चढ़ते गए और महान बने। कारण केवल एक ही था की वह सदा ऐसी मनःस्थिति में रमे रहते थे की एक चुम्बक की भांति सभी वांछित व्यक्ति, परिस्थिति एवं साधन बस खिंचते हुए उनके पास आ पहुंचे।

जिनका संदर्भ लेकर हमने ऊपर अपने विचार व्यक्त किए हैं उनमें से आठ दस जन तो राष्ट्रीय स्तर के श्रेष्ठतम उद्योगपति के रूप में उभरे और प्रतिष्ठित हो गए। हमारा अपना व्यक्तिगत अनुभव भी यही है की मनःस्थिति के द्वारा हम कुछ नहीं में बहुत कुछ और बहुत कुछ को कुछ नहीं बना सकने की ईश्वरीय क्षमता से पूरित हैं। संकल्प शक्ति के जागरण के पीछे भी यही रहस्य छुपा हुआ है। संकल्प शक्ति के जागरण द्वारा हम अपने निर्धारित उद्देश्य पर अधिक स्पष्टता प्राप्त करते हुए एक ऐसी मनःस्थिति को प्राप्त हो जाते हैं जहां समस्याएं और अभाव होते हुए भी साथ ही साथ मार्ग भी किसी न किसी प्रकार निकलते हैं। विचारों की शक्ति का सूक्ष्म जगत भले ही खुली आँखों नहीं दिखता हो परन्तु उसकी महा शक्ति को नकारा नहीं जा सकता है।

विचारों में शक्ति भरनी पड़ती है तभी जा कर वह सामान्य से विचार अद्भुत कार्य करने लगते हैं ठीक वैसे जैसे लोहे के टुकड़े में बिजली के संघान के द्वारा चुम्बकत्व की क्षमता भरी जाती है। एक अदना सा लोहे का टुकड़ा जब एक बार चुम्बक बन गया तो सदा सदा के लिए उसमे आकर्षण की शक्ति आ जाती है। चुंबक तो फिर भी एक निर्जीव पदार्थ है और तुम एक सजीव , प्राणवान , जागृत जीव हो। तुम्हारे भीतर की अपार संभावनाओं को भी विचार शक्ति के रूप में जगा कर बहुत कुछ सार्थक और सद उद्देश्य की सेवा में सम्पन्न कराया जा सकता है।

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