बेकार के विचारों को दिमाग किराये पर

बेकार के विचारों को दिमाग किराये पर

 

शायद सच ही है की अधिकांश लोगों को यह ज्ञात ही नहीं होता की दिमाग में आने वाला प्रत्येक विचार -ख्याल ऊर्जा के खर्च से ही उत्पन्न होता है और ऊर्जा के लगातार खर्च से ही हमारे मस्तिष्क में चलता है। असली बात तो यह है की इस प्रकार की बातों को बहुत कम बताया जाता है और जब कोई मनस्वी बता भी रहा होता है तो हम उन बातों को कान ही नहीं देते।

दिमाग में चलने वाले विचार न केवल हमारी ऊर्जा के खर्च से ही पलते और विकसित होते रहते हैं बल्कि यह सारे विचार हमारे ध्यान में बने रह कर अन्य अनेकों विचारों को सामने आने ही नहीं देते हैं। जैसे आपने खूब देखा होगा की manipulative लोग sincere लोगों को बड़े व्यक्ति की नज़र में आने ही नहीं देते हैं। हाँ अगर वह बड़ा व्यक्ति विवेकी है तो वह इस बात को समझ कर मैनेज कर लेता है।

जिस प्रकार के विचार हमारे मस्तिष्क में घूमते रहते हैं और फिर स्थिर हो जाते हैं। वह अपने आकर्षण के द्धारा अपने जैसे अनेकों अन्य विचारों को घेर कर अपने साथ बुला कर ले आते हैं। और हमारा मस्तिष्क अनजाने में ही एक विशेष प्रकार के विचारों की बिरादरी का शिकार बना रहता है। एक जैसी सोच वाले लोग इसीलिए इकठ्ठा हो कर अपना एक टोला बना लेते है। एक जैसे विचार वाले लोग अपिरचित होते हुए भी एक दूसरे को ढूंढ कर मित्र बन जाते हैं।

विचार अपने प्रकार की इच्छाओं को जन्म दे सकते हैं , अपने प्रकार की कल्पनाओं को रच सकते हैं और हमारे पुरे जीवन की दिशा को बदल कर रख डालते हैं। यह सारि प्रक्रिया हमारे मस्तिष्क के भीतर होती है इसीलिए इसे खुली आँखों देख पाना सम्भव नहीं होता है। पर मनुष्य का पूरा जीवन इस क्रिया की अधीन ही चलता चला जाता है।

सीखना तो यह है की कैसे हम सबसे पहले तो जानें की किस प्रकार के विचार हमारे मस्तिष्क में जड़ जमा कर अपना पूरा कुटुम्ब बसा चुके हैं।

सीखना यह भी है की हम जान सकें की हमारे मस्तिष्क में बसे विचारों के समुदाय किस स्तर तक हमारे पुरे जीवन की दिशा को हाँक चुके हैं।

सीखना यह भी है की किस प्रकार हम अनर्गल अर्थात बेकार के विचारों से अपने आपको मुक्त कराएं।

सीखना तो यह भी है की किस प्रकार हम यह सुनिश्चित करें की भविष्य में बेकार के विचार दोबारा हमारे मस्तिष्क में नहीं घुस पाएं।

सीखना यह भी है किस प्रकार वांछित विचार अर्थात जैसे विचार हमे अपने जीवन की प्रगति हेतु चाहियें उन्हें हम कैसे धारण करें - और अपने भीतर विकसित और पल्ल्वित करें जिससे हमारे पुरे जीवन की दिशा सार्थकता की ओर बढ़ चले।

सीखना तो यह भी है की कैसे सामान्य से विचारों को एक बेधक शक्ति का रूप देकर हम उसके द्धारा अपने जीवन में कठिन से कठिन कार्य - उपलब्धि को प्राप्त करें।

मित्र यही संकल्प शक्ति की विद्दा है।

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